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Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 81, मार्च(द्वितीय), 2020

क्योंकि मैं एक लड़की हूँ

डा० नितिषा श्रीवास्तव “कनकपुष्प”

मेरा दुख किसी इंसान को रुला नही सकता, क्योंकि मैं एक लड़की हूँ। मेरा कष्ट कोई और महसूस नही कर सकता, क्योंकि मैं एक लड़की हूँ। मेरे आँसू किसी की आँखें नम नहीं करते, क्योंकि मैं एक लड़की हूँ। मेरा दुख किसी और को दुखी नहीं करता, क्योंकि मैं एक लड़की हूँ। मेरी व्यथा किसी को व्यथित नहीं कर सकती, क्योंकि मैं एक लड़की हूँ। केवल इतनी ही नहीं, खूबिया और भी है मुझमें। जो इनसे भी ज्यादा चकित करती है, हाँ है मुझमें।। मैं दूसरों के दर्द को महसूस कर सकती हूँ, क्योंकि मैं एक लड़की हूँ। मैं दूसरों के दुख में भागीदार बन सकती हूँ, क्योंकि मैं एक लड़की हूँ। मैं किसी के खुशियों में अपनी खुशियाँ खोज लेती हूँ, क्योंकि मैं एक लड़की हूँ। मैं किसी की मुसीबतों को अपना बना लेती हूँ, क्योंकि मैं एक लड़की हूँ। मैं किसी के आसुओं को अपना दर्द बना लेती हूँ, क्योंकि मैं एक लड़की हूँ। मैं किसी के मकान को घर बना देती हूँ, क्योंकि मैं एक लड़की हूँ। हाँ-हाँ, मैं ये सब बड़ी आसानी से कर लेती हूँ, क्योंकि मैं एक लड़की हूँ। क्योंकि मैं एक लड़की हूँ।।

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