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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 81, मार्च(द्वितीय), 2020

आँसू की बरसात

नीतू शर्मा

नयन कभी जो बादल बनकर आँसू की बरसात हैं करते, मन की तप्त ज़मीं को थोड़ा शीतल,निर्मल, शान्त ये करते, अाँसू की भी चमक निराली बिजली बन पलकों पे चमकते, सिसकियाँ भर गर्जनाएं होती भोले-भाले सपने हैं डरते, दिल कुछ हल्का हो जाता है जीवन के अनुभव ये कहते, नयन कभी जो बादल बनकर आँसू की बरसात हैं करते.

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