मुखपृष्ठ
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 81, मार्च(द्वितीय), 2020

फिर से.....

गुरुदेव प्रजापति

आज फिर से सीने में आग लगी है.... बददुआ निकलती है उनके लिये.... बहोत गुस्सा है मन..... क्यों? क्योंकि किसीने देश जलाया है जवान जलाये है परिवार जलाये है आतंक मचाया है वो कौन है? मुझे नहीं पता पर..... लोग उन्हे आतंकवादी कहते है | मन से बददुआ की ज्वाला निकलती है उनको जला देने की मिटा देने की फिर हमने जुलुस निकाले उनकी हाय हाय की झंडे जलाये मोमबत्ती जलाई मौन भी रखा फिर? फिर हम सो गये..... कुछ साल बाद फिर से कोई देश जलायेगा अटैक करेगा बोंब डालेंगा और हम फिर से..... फिर से..... फिर से.....


कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें