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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 81, मार्च(द्वितीय), 2020

देश धुंआ धुंआ

गुरुदेव प्रजापति

वो आकर बोले अब हम चुप नहीं बैठेंगे खून का बदला खून बदला लेंगे हम फिर हमने जुलुस निकाले मोमबत्ती जलाई मौन रखा फिर वो लापता फिर हम अपने घर और देश धुंआ धुंआ।


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