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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 81, मार्च(द्वितीय), 2020

बहुत सहा तुझे जिंदगी

डॉ० अनिल चड्डा

बहुत सहा तुझे जिंदगी फिर भी रुलाती रही दूर से ही खुशियों की झलक दिखलाती रही हवा में उड़ गए वो सपने जो हमको तू दिखाती रही पग-पग पर संघर्षों से रूबरू तू कराती रही मौत को देखा नहीं कभी फिर भी याद दिलाती रही कोई ऐसा पल न था जब मौत याद आती नहीं चोली - दामन का साथ है सुख-दुख का जिंदगी में सुख में भूल ना जाऊँ उसे दुख बार-बार लाती रही मैं हार कर भी नहीं हारूँगा तुझसे कभी ऐ जिंदगी तू मेरी ही रही हरदम चाहे उम्र भर सताती रही


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