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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 81, मार्च(द्वितीय), 2020

क्योंकि मैं सत्य हूँ

आलोक कौशिक

मैं कल भी अकेला था आज भी अकेला हूं और संघर्ष पथ पर हमेशा अकेला ही रहूंगा मैं किसी धर्म का नहीं मैं किसी दल का नहीं सम्मुख आने से मेरे भयभीत होते सभी जानते हैं सब मुझको परंतु स्वीकार करना चाहते नहीं मैं तो सबका हूं किंतु कोई मेरा नहीं फिर भी मैं किसी से डरता नहीं ना कभी झुकता हूं ना कभी टूटता हूं याचना मैं करता नहीं संघर्षों से थकता नहीं झुक जाते हैं लोचन सबके जब मैं नैन मिलाता हूं क्योंकि मैं सत्य हूं केवल सत्य हूं बादलों द्वारा ढक जाने से गति सूर्य की रुकती नहीं कितनी भी हो विपरीत परिस्थितियां परंतु मेरी पराजय कभी होती नहीं


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