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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 81, मार्च(द्वितीय), 2020

यही तो इश्क है

अजय एहसास

दुनिया में उसको छोड़ ना परवाह किसी की आ जाये बिना बुलाये कभी याद किसी की तस्वीर गर जो आंखों में बस जाय किसी की कहते है दुनिया वाले कि यही तो इश्क है। दीदार उनका करने को जो दिल रहे बेताब उनके बगैर दुनिया में सब कुछ लगे खराब मिलते ही खुद बखुद अगर कह जाते है आदाब कहते है दुनिया वाले कि यही तो इश्क है। नजरों से मिल नजरें निगाहें चार हो जाये समझाना मन को की कहीं ना प्यार हो जाये दिल भी हमेशा चाहे कि दीदार हो जाये कहते है दुनिया वाले कि यही तो इश्क है। दुनिया की नजर में नजर अन्दाज कर देना मौका मिले महबूब को जी भर के देखना नजरों के रास्ते किसी के दिल में उतरना कहते है दुनिया वाले कि यही तो इश्क है। पेंसिल से कागजों पे नाम लिखना मिटाना खुद में ही मस्त रहना किसी को ना बताना बिस्तर पे तकिया पकड़े हुए नींद ना आना कहते है दुनिया वाले कि यही तो इश्क है। दिल और दिमाग में हो जैसे छा गया कोई ऐसा लगे कि दिल को जैसे भा गया कोई जो भी गुरूर था वो जैसे खा गया कोई कहते है दुनिया वाले कि यही तो इश्क है। दिल बात करना चाहे किसी से जो देर तक ढूंढे नजर किसी को अगर दूर दूर तक रस्ता पहुंचने का अगर ढूंढे हुजूर तक कहते है दुनिया वाले कि यही तो इश्क है। संदेश देख फोन पे मुस्कान आ जाना देखें जो आनलाइन दिल में जान आ जाना रिप्लाइ करते करते उनका ख्वाब आ जाना 'एहसास' हो गया है कि यही तो इश्क है कहते है दुनिया वाले कि यही तो इश्क है।


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