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Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 81, मार्च(द्वितीय), 2020

दिल बेताब...

नरेन्द्र श्रीवास्तव

दिल बेताब ,तुम्हें पुकारे। पल-पल...हर पल वाट निहारे।। मिलें और फिर ,मिल बतियाएं। इक-दूजे का हाल सुनाएं। छू...छूकर अपनत्व जताके, सिमट सिमटते नहीं अघाएं।। ख्वाबों में जो दृश्य लिये हैं। सचकर,उनको याद बना रे।। दिल बेताब ,तुम्हें पुकारे। पल-पल...हर पल वाट निहारे।। अब बेताबी,सही जाये न। दूरी दिल की,गही जाये न। आस,प्यास में सांसें उलझी, मन की मन से,कही जाये न।। धक धक धड़कन का स्वर गूंजे। पल पल, हर पल कहे कि हारे।। दिल बेताब ,तुम्हें पुकारे। पल-पल...हर पल वाट निहारे।। बेसुध हो दुनिया को भूलें। इक-दूजे बाहों में झूलें। पोर-पोर में प्रेम बसा है, डूबें ओर छोर को छूलें।। शेष अशेष कि रहे न कोई। अमृतमयी रसपान करा रे।। दिल बेताब ये,तुम्हें पुकारे। पल-पल...हर पल वाट निहारे।।

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