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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 81, मार्च(द्वितीय), 2020

गुड़िया की होली

प्रिया देवांगन प्रियू

रंग बिरंगे सभी ओर जी, हरियाली है छाई। फागुन की होली है देखो , गुड़िया रंग है लाई।। घूम घूम के खेले होली , सबको रंग लगाई। पापा के संग गुड़िया रानी , पिचकारी खूब चलाई।। चुन्नू मुन्नू दोनों आये , रंग साथ मे लाये। गुड़िया रानी को देखकर , दंग सभी रह जाये।। दादा जी मुखौटा पहने , गुड़िया को डराये। दौड़ दौड़ के खेले होली , बच्चे शोर मचाये।। घर घर मीठे पकवान बनाये , मिल बाँट कर खाये। बच्चे बूढ़े सभी मजे से , होली खूब मनाये।।


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