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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
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Sahityasudha
वर्ष: 3, अंक 57, मार्च(द्वितीय), 2019

तेरा इंतजार

सत्येन्द्र बिहारी

मै तुझे प्यार बेशुमार करता हूं, तुम खफा ना हो जाओ इसलिए मै डरता हूं । तुझे देखने को तरसे मेरी आंखे, मै सुबह-शाम तेरा इंतजार करता हूं।। छुप-छुप के झरोखों से देखा करता हूं, तुम गुजरों गली से दुआ मै करता हूं । भर नजर देख लूं तो चैन मिल जाए मुझे, मै सुबह-शाम तेरा इंतजार करता हूं।। जिस घड़ी ना देखू तुझे बेचैन होके फिरता हूं, तुम नजर जो आ जाओ मै तुम्हीं पे मरता हूं । दिल के आइने मे तेरी तस्वीर छिपा रक्खी मैंने, मै सुबह-शाम तेरा इंतजार करता हूं।। मै कुछ कहूं जो अगर रूषवाई से भी डरता हूं, तुम अगर करार करो मोहब्बत का जाम भरता हूं। तेरी परछाई बनकर सदा रहू तुझमें मै सुबह-शाम तेरा इंतजार करता हूं।। खुद से ज्यादा मै तुझपे ऐतवार करता हूं, तेरी मुस्कराहटो पर जॉ॑ निसार करता हूं। तुम तो बसती हो मेरी सांसों में, मै सुबह-शाम तेरा इंतजार करता हूं।।


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