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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
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Sahityasudha
वर्ष: 3, अंक 57, मार्च(द्वितीय), 2019

एक बरस मे एक बार ही जगती हो

डॉ गुलाब चंद पटेल

"एक बरस मे एक बार ही जगती, होली की ज्वाला
एक बार ही लगती बाल जगती दीपो की माला
दुनिया वालों किंतु किसी दिन आ मदिरालय में देखो
दिन के होली रात दीवाली रोज मनाती मधु शाला! "
- मधु शाला

होली का त्योहार पूरे भारत देश में मनाया जाता है, होली का इंतजार सभी लोग करते हैं, होली रंगो का त्योहार है,, लोग अपने गीले शिकवे भुला कर एक दूसरे के गले लगते हैं, होली का त्योहार फागुन महीने में (मार्च) मे आता है, होली हिंदू ओ का प्रमुख त्योहार है, इस महीने में लोग फागुन और होली के गीत गाते हैं, इस त्योहार मे गुजिया, पापड़ और हलवा खाते हैं, होलिका दहन किया जाता है, होली का इतिहास रहा है, बहुत समय पहले हीरण्य कश्यप नामक एक असुर था, हीरण्य कश्यप की एक बहन होलिका नामक थी, हीरण्य कश्यप को एक लड़का था, वो विष्णु भगवान की पूजा और भक्ति करता था, लेकिन हीरण्य कश्यप को ये पसंद नहीं था, उसने प्रहलाद इसका लड़का था उसे मारने का तय किया, उसने अपनी बहन होलिका से मदद ली, होलिका प्रहलाद को अपनी गोदी में लेकर होली दहन के लिए बैठ गई, होलिका को आग मे न जलने का वरदान था, होली जलाया गया और प्रह्लाद बच गया, होलिका भस्म बन गई, ये होली का इतिहास है, तब से लोग होलिका उत्सव मनाते हैं, भारत में अलग अलग प्रदेश में अलग अलग प्रकार से होली का त्योहार मनाया जाता है, गांवो मे लकड़ी, गोबर और घास का ढेर लगा कर जलाया जाता है और एक ऎसी मान्यता है कि, होली की परछाई किस ओर दिखती है उससे अनुमान लगाया जाता है कि अगली बरस बारिश केसी होगी और फसल केसु होगी, अगले दिन लोग रंग, आ बिल गुलाल से होली खेलते हैं, ब्रज की होली पूरे देश का आकर्षण बिन्दु माना जाता है, लाठमार होती है, पुरुष लोग महिला ओ पर रंग बरसाते हैं और महिला ए पुरुषों को लाठी मारती है, कपड़े के कोड़े बनाया जाता है और महिला ए उससे पुरुष को मारती है, इसी तरह मथुरा और वृंदावन में 15 दिन तक होलिका पर्व मनाया जाता है, कुमाऊं मैं गीत की बैठक होती है और शास्त्रीय संगीत की बैठक होती है, हरियाणा में देवर को सताने की प्रथा प्रचलित है, भाभी अपने देवर को सताती है और देवर अपनी भाभी पर रंग डालता है, विभिन्न देशो में विभिन्न लोग और धार्मिक संस्थाए इस्कॉन या वृंदावन में बांके बिहारी मंच पर होली श्रु गार करके उत्‍स्‍व मनाते हैं,होली के त्योहार मे गांवो मे रामलीला की भावाई होती है, दो या तीन दिन ये उत्सव मनाया जाता है, गुजरात में किसी गांव में होली के त्योहार मे अंगारे में बिना बूट या चप्पल खुले पग से चलते हैं लेकिन किसीको भी पेर में जलन नहीं होती है,राजस्थानी लोग पूरे देश में काम के हेतु अलग अलग प्रदेश में जाते हैं, उनका एक मुहावरा है कि, होली तो अठे, कठे, दिवाली बारे मास, मतलब होली साल में एक बार ही आती है और दिवाली तो रोजाना होती है, होली के त्योहार मे लोग रंग में रंग जाते हैं और खुशी से होली का त्योहार मनाते हैं,!


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