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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
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Sahityasudha
वर्ष: 3, अंक 57, मार्च(द्वितीय), 2019

प्रतिकूल व्यवहार

राजीव कुमार

नई सरकार ने अपनी सक्षम कार्यकुशलता और थोड़ी-बहुत फिजूलखर्ची करते हुए सुदूर गांव में एक संयंत्र लगाया।

गांव के लोग तो शहर जा चुके थे आजीविका चलाने, तत्काल में शहरी लोगों को काम करने के लिए बुलाया गया।

आजीविका के साथ-साथ गांव वाले और शहर वाले एक-दूसरे की सभ्यता और लोक व्यवहार की तरफ भी आकर्षित हुए।

बातचीत, बेईमानी, ईमानदारी और सच-झूठ आकर्षण बिंदु थे।

गांव वाले तो शहर जाकर वहां की आवोहवा में अपनी मासूमियत गंवा बैठे मगर अफसोस कि शहर के लोग गांव आकर भी अपने अंदर वैसी सज्जनता और मासूमियत पैदा नहीं कर पाए।


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