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वर्ष: 3, अंक 56, मार्च(प्रथम) , 2019



पीठ पे तू वार न कर


सतविन्द्र कुमार राणा


       
आग फैले तू ऐसी कार न कर
तेज बारूद ही की धार न कर।

घुस जा घुसना है अगर, सीने में
शूल बन पीठ पे  तू वार न कर।

ठेस छोटी ही मुझको काफी है
मान जा खुद को याँ लुहार न कर।

खतरा हो जिससे तेरे होने पर
खुद में ऐसा कोई सुधार न कर।

बाकी है काफी दरमियाँ अपने
बात छोटी पे आर-पार न कर।
 

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