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वर्ष: 3, अंक 56, मार्च(प्रथम) , 2019



अपने -अपने वेलैंटाइन


सुरेश सौरभ


भदर- भदर कुछ लोग कुछ पीट रहे थे। घनी चीखों से माहौल भरने लगा। पुलिस आई । भदर -भदर रोका,देखा दो रोती हुई आत्माएं आलिंगनबद्ध थी। पुलिस ने उनसे पूछा यहाँ कैसे?वे बोले- वेलैंटाइन। पीटने वाले से पूछा- तुम सब यहां कैसे? वे बोले -वेलैंटाइन।' पुलिस ने अपने माथे पर हाथ रखकर कहा-साला- मेरा भी वेलैंटाइन यही होना था।


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