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वर्ष: 3, अंक 56, मार्च(प्रथम) , 2019



पसीने की महक


राजीव कुमार


कवर पर मिट्टी लगी चॉकलेट निकालकर माधव ने अपने पांच वर्षीय बेटे को पकड़ाई और गोद में लेकर पुचकारते हुए कहा, ‘‘मेरा हीरा बेटा कहां गया था?’’

उसके बेटे ने चॉकलेट को उलट-पलटकर देखा और गोद से नीचे उतरने के लिए छटपटाते हुए कहा, ‘‘मम्मी के पास जाना है।’’

माधव ने अपनी पकड़ और मजबूत बनाई और कहा, ‘‘हमेशा मम्मी-मम्मी करता रहता है, पापा-पापा तो जल्दी बोलता ही नहीं है।’’

उसका बेटा मासूमियत से बोला, ‘‘पापा, रोज आपका शर्ट महकता था, आज आपका मुंह खराब महक रहा है। पापा, आप नाली में क्यों सोए थे?’’

माधव ने अपने बच्चे की तरफ देखा और जमीन पर रख दिया। बच्चा मां की गोद में जाकर ऐसे छिप गया जैसे किसी पोटली वाले बाबा से बचकर आया हो।


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