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वर्ष: 3, अंक 56, मार्च(प्रथम) , 2019



हिसाब


चाँदनी सेठी कोचर


आज सुबह से ही सोनी का दिमाग़ बहुत ही गर्म था , पहले तो पति पर गुस्सा हो गई , फिर अपने आप ही बोलती हुई , कमरा ठीक करने गई ! इतने में गेट पर घंटी बजी, सोनी की कामवाली थी ! जो आते ही काम करने में लग गई ! उधर सोनी भी कमरा सही करके , अपने कपड़े लेकर नहाने चली गई !

वहीं काम वाली बर्तन कर के सफ़ाई में लग गई ! सोनी कभी कुछ नहीं कहती थी, उसको क्योंकि सोनी को ज्यादा रोक - टोक करने की आदत नहीं थी !

नहा कर आते ही सोनी अपने लैपटॉप को ऑन करती है , और अपने काम में लग जाती है ! काम वाली अभी पोछा लगा रही थी !

अचानक सोनी काम करते - करते किचन में गई , और उसने देखा की काम वाली आज फिर से गीले बर्तन उठाकर , नीचे लकड़ी के दराज में रख दिए , यह सब देख कर, उसको गुस्साआ गया और उसने सोच लिया , कि अब तो वह इस काम वाली को निकला कर ही दम लेगी , क्योंकि वह अब उस से तंग आ चुकी थी !

सोनी ने अपने पति को बोला की आज मैं इसका हिसाब ही कर रही हूँ , तंग आ गई हूँ, मैं इस से !

पति ने कहा " देख लो तुम्हें जैसा ठीक लगे "

आज वैसे भी सोनी का गुस्सा आसमान पर था , उसे कही तो अपना गुस्सा निकलना ही था ! वह कॉपी पेन लेकर टेबल पर रख कर उसका हिसाब बनने लगी , और उसने सोचा आजअभी ही जाते हुए , उसको पैसे देकर बोल दूँ गी , कि कल से काम पर ना आयें ! सारा हिसाब करके सोनी पैसे लेकर हाथ में बैठ गई !

इतने में काम वाली कहा " अच्छा दीदी मैं जा रही हूँ , आप दरवाज़ा बंद कर ले ! "

पैसे अभी सोनी के हाथ में ही थे , पर जाते हुए वह काम वाली को एक भी शब्द ना बोल पाई ! और अच्छा ठीक है. कह कर दरवाज़ा बंद कर दिया !


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