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वर्ष: 3, अंक 56, मार्च(प्रथम) , 2019



गौरैया


सुशील शर्मा


        
गौरैया उड़ी।
तिनके बीने।
मुनिया की खिड़की पर।
एक घोंसला।
बिजली के लट्टू सा।

मुनिया ने देखे।
घोंसले में ,
दो तीन अण्डे।
सेती गौरैया
मुनिया हँसी।

आंधी आई।
गौरैया चिचिआई।
मुनिया भागी।
घोंसला टूटा।
अण्डे फूटे।
गौरैया चुप थी
मुनिया रोई।
     

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