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वर्ष: 3, अंक 56, मार्च(प्रथम) , 2019



बसंत ऋतु है आई


सविता अग्रवाल 'सवि'


        
सब ऋतुओं की रानी है 
बसंत ऋतु सुहानी है 
सर्दी ऋतु का हुआ अंत
मौसम सुहाना लाया बसंत
आकाश में उड़ती पतंग सतरंगी 
बच्चे, बूढ़े नाचें साथी, संगी
खेतों में सरसों है फूली 
कृषकों की किस्मत है झूली 
झूम झूम कर पंछी गाएं
धूप दूधिया में सब नहायें 
अमुआ की डाल है डोल रही 
कोयलिया भी है बोल रही
बगिया महकी, फूल खिले हैं
भंवरों के भी तार छिड़े हैं 
बहती हवा होकर स्वच्छंद 
पक्षी गाते मस्त-मलंग
सुन्दर छटा बिखर रही है 
सूर्य किरण निखर रही है 
धरती पर हरयाली छाई 
देखो बसंत ऋतु है आई 
         

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