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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 87, जून(द्वितीय), 2020

अंतस् की दशम गोष्ठी-31 मई 2020

लॉक डाउन के बावजूद अंतस् की गोष्ठियों का क्रम बरक़रार

जीवन क्षण भंगुर है, आओ! आपस के सब बैर भुला दें..... डॉ कविता किरण

‘लॉकडाउन के दौर में जब भौतिक रूप से मिलना दुष्कर है तब अन्तस् की गोष्ठियों का अनवरत जारी रहना अत्यन्त सुखद अनुभव है’-अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रसिद्द कवि-शायर आदेश त्यागी ने अंतस् को नये आयाम और नयी ऊँचाइयाँ छूने के लिये बधाई देते हुआ कहा।

सभी को ज्ञात हो कि अंतस् की दसवीं काव्य-गोष्ठी का अतिसफल आयोजन 31 मई रविवार को वाहट्सप के अंतस्-साहित्यिक परिचर्चा समूह में हुआ

ऑनलाइन होने वाला यह तीसरा आयोजन था जो कवि सम्मेलन के रूप में पहले से अधिक नवीन प्रयोगों के साथ हुआ। ऑडियो और काव्य रचनाओं के शब्द –स्वरुप के साथ-साथ ऑडियो के दृश्य रूप यानी विडियो भी शामिल किये गए जो अब सभी को संस्था के यू ट्यूब चैनल (Antas mail) पर उपलब्ध रहेंगे। गोष्ठी का संयोजन संस्था की अध्यक्ष पूनम माटिया और संरक्षक नरेश माटिया ने किया।

मुख्य अतिथि फालना, राजस्थान से प्रसिद्द कवयित्री कविता किरण और अतिविशिष्ट अतिथि के रूप में अनुव्रत समिति की मंत्री कुसुम लुनिया की उपस्थिति रही। ऑस्ट्रेलिया से प्रगीत कुँअर, भावना कुँअर और चेन्नई से मंजू रुस्तगी विशिष्ट अतिथि रहे। सान्निध्य रहा उत्तरप्रदेश से राम आसरे गोयल तथा राजस्थान से सुरेन्द्र कुमार शर्मा का। अंतरराष्ट्रीय सचिव-अंतस्, जापान से रमा शर्मा भी बतौर विशिष्ट अतिथि गोष्ठी में सक्रीय रहीं।

सुन्दर, सुगठित, सुरुचिपूर्ण संचालन पूनम माटिया ने किया तथा संस्था की ओर से मशहूर शायर व् साहित्यकार सर्वेश चंदौसवी को श्रद्धांजलि अर्पित की।

स्वागत-उद्बोधन संस्था की वरिष्ठ उपाध्यक्ष अंशु जैन और प्रचार सन्देश प्रचार-सचिव कामना मिश्रा द्वारा देने के बाद मधुर स्वर में सरस्वती वंदना अलीगढ़ की ममता वार्ष्णेय ने की।

उपरोक्त उल्लिखित के अतिरिक्त ग़ाज़ियाबाद से तूलिका सेठ और डी पी सिंह तथा देश की राजधानी दिल्ली से दुर्गेश अवस्थी , राम लोचन, दास आरुही आनंद. सरिता गुप्ता, सुरेश भारती, मीना शर्मा, अंजू अग्रवाल और सुशीला श्रीवास्तव ने रोचक काव्य पाठ किया।

लगभग ढाई घंटे तक चली इस ऑन लाइन काव्य गोष्ठी में 22 कवियों ने बहुत सुंदर काव्य पाठ किया।

कुछ चयनित काव्यांश:-

कुछ इस अन्दाज़ से महफ़िल में हर दिल शाद रह जाये
तेरी आवाज़ की इक गूँज तेरे बा'द रह जाये
सुख़नवर! यूँ तो बेहद ख़ूबसूरत हैं तेरे अशआर
अगरचे शे'र तो वो है, जो सुन कर याद रह जाये.......... आदेश त्यागी

विपदा में भी क्लेश जताना, क्या हमको शोभा देता है
सच, शब्दों का दुरपयोग भी, मन पर इक बोझा देता है
गंगा की शीतल धारा से, सूरज के मुंह-हाथ धुला दें
जीवन क्षणभँगुर है आओ, आपस के सब बैर भुला दें........ कविता किरण

बदल कर नज़रिया ज़रा देखिए तो
नयी शक्ल नज़र आयेगी ज़िन्दगी की............. पूनम माटिया

जनाज़े में नहीं होगी अदावत और दूरी भी
मैं ज़िंदा हूँ तभी तक दुश्मनी का खेल सारा है.......... पूनम माटिया

नदी ठहरी नहीं अपने सफ़र में तब तलक जब तक
समुन्दर में ना अपनी जब तलक परछाइयाँ देखीं..............प्रगीत कुँअर

तुम्हें पूजा है जीवन में, निहारा मन के दर्पण में
स्वयं को हारकर ही तो तुम्हें हर जीत दी मैंने..................राम आसरे गोयल

कैसा जीवाणु आया, हर ओर है खौफ मचाया।
देता नहीं हमें दिखाई,घनघोर अंधेरा छाया।....... सुरेन्द्र कुमार शर्मा

मेरा बिछौना बनी चुनौतियाँ, ओढ़ लिए मैंने हौंसले।
कोई चिरैया नहीं हूँ मैं जो, पंख मेरे यूँ नोंच ले।...........मंजू रुस्तगी

स्वस्थ समाज संरचना करने, संयम का संकल्प सजायें।
आओ मिल हम दीप जलाएं। संयम का संकल्प सजायें।.........कुसुम लुनिया

मैं ही अक्षरशः वर्णित हूँ, वेदों और पुराणों में
सत्य सनातन का हित सोचूँ, मैं इसका अधिकारी हूँ, हाँ मैं भगवा धारी हूँ.........राम लोचन

अपनी आँखों की ये नावें,आँसुओं में ही रहीं
इस तरह तय ज़िन्दगी का, हर सफ़र हमने किया.........भावना कुँअर

पागल मैं हो न जाऊँ एक ही मिलन से, एक ही मिलन से एक ही छुअन से
छुअन तुम्हारी कहीं कर दे न घायल, घायल करो न मुझे नेह चितवन से.......... दुर्गेश अवस्थी

इधर मैं शम्अ की सूरत, उधर तू मिस्ले-परवाना
फ़ना तुझ को भी कर डाला, मैं ख़ुद को भी जला बैठी......... तूलिका सेठ

कहना-सुनना है भला, भली लगे तकरार।
यह ख़मोशी लील गई, सब अपनों का प्यार।।..........सरिता गुप्ता

समझ ले दास तू गर चाहता है आसमां छूना
यहां जो काम करता है उसी का नाम होता है............. दास आरुही आनंद

भाइयों के बीच की दीवार गिरती ही नहीं
जान आई है न जाने कौन सी सीमेंट से ............ देवेन्द्र प्रसाद सिंह

पिता है बस एक खामोश माली-सा
रखता ख़्याल अपने बाग़ के हर फूल, हर डाली का........... रमा शर्मा

सरकारें चल रही हैं सहारे शराब के
सत्ता का नशा बढ़ता है इसके सुरूर से......... अंशु जैन

अब आदी हो गये तुम्हारे बगै़र ख़ुश रहने के
उन गलियारों में लौट जाने को अब जी नहीं चाहता, दूरियाँ मिटाने को अब जी नहीं चाहता.......कामना मिश्रा

वक्त बड़ा बलवान है, भर देता हर घाव।
सह लेंगें हर पीर हम, मन में हो यह भाव।।............. सुशीला श्रीवास्तव

कल तक जो एक एक पेड़ काट रहा था
आज सड़कें भी हमारे लिए खाली छोड़ रहा है! अचानक! ये मानव कहां खो गया है ?......... अंजू अग्रवाल

भूत काल से ही भविष्य की यात्रा प्रारंभ होती है
कभी कभी बचपन में लौटने का मन तो करता है................... मीना शर्मा

मैं धरा की धूल हूँ , वही है आकाश मेरा
उसी से कल्याण मेरा , उसी से निर्वाण मेरा, इस बदन के पार है जो रूप तेरा ........... सुरेश भारती

अंतस् की ऑनलाइन गोष्ठियों की विशेषता रही है कि गोष्ठी होते हुए भी यह सम्मेलन का रूप इख्तियार कर लेती है इसमें देश-विदेश से उपस्थित कवि, समाज सेवी, पत्रकार काव्य-प्रेमियों की सजग व् सक्रिय उपस्थिति के कारण। अलीगढ़ से दिनेश कुमार शर्मा,उज्जैन से कैलाश सोनी सार्थक , दिल्ली से विनयशील चतुर्वेदी, मंजू मित्तल, पूजा गोयल, डॉली अग्रवाल, वीरपाल सिंह , अनुभव गर्ग, पुष्कर सिन्हा और ब्रजभूषण गुप्ता तथा अन्य कई साहित्य प्रेमियों की विशिष्ट उपस्थिति रेखांकित करने योग्य है।

संस्था के महासचिव दुर्गेश अवस्थी ने सभी का आभार व्यक्त किया।

डॉ पूनम माटिया
अध्यक्ष, अंतस्
कवयित्री, शायरा, मंच-संचालिका
स्वतंत्र लेखन
Pocket - A , 90-B
Dilshad Garden
Delhi-110095
2 259 8764 , 93126 24097, 93199 36660


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