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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 87, जून(द्वितीय), 2020

डॉ० गोरख प्रसाद मस्ताना की भोजपुरी कहानियों
की अनुपम भेंट "अगरासन" की समीक्षा

समीक्षक: कृपी कश्यप

कहानी एक कथात्मक विद्या है जो घटना, भाव, और भावना की श्रृंखला पर आधारित होती है। कथा-वस्तु जिस भी घटना पर अवलंबित हो लेकिन निश्चित रुप से वह कहानीकार द्वारा निर्धारित उद्देश्य की ओर अग्रसारित होती है। कहानी की विवेचना के लिए उसके तत्व, विचार, शैली, शिल्प,सरंचना और तथ्य आदि का विश्लेषण आवश्यक है।

भोजपुरी कहानी लगभग 70 वर्षों का सफर तय करते करते अपने को श्रेणीबद्ध भी की है-जिसमे समाहित है, यथा, आदर्शोन्मुखी, यथार्थवादी, प्रगतिशील, प्रयोगवादी,मनोवैज्ञानिक, मनोविश्लेषणात्मक, अकहानी और समानांतर कहानी आदि।

सद्य प्रकाशित भोजपुरी कहानी संग्रह अगरासन में कुल 18 कहानियाँ हैं । इस कहानी संग्रह के कहानीकर डॉ. गोरख प्रसाद मस्ताना है जो एक सुविख्यात साहित्यकार ,लेखक और गीतकार है। इस संग्रह में उन्होंने अपनी कहानियों में अनेकानेक विषयों को समेटने की कोशिश की है । इन कहानियों में सामाजिक, परिवारिक ,नारी- सशक्तिकरण और धर्म जैसे कई मुद्दे रेखांकित व उधृत हैं ।

संग्रह का शीर्षक 'अगरासन' रखने के पीछे का कारण भोजपुरी साहित्य में अपने पूर्व के (predecessors) भोजपुरी साहित्यकारों को अर्पित करने का प्रयास लग रहा है। यह कहानीकार की विन्रमता का सूचक है।

लेखक की रोचक भाषा कहानी संग्रह को दिलचस्प बना देती है । मुख्य तीन धाराओं की कहानियों का संग्रह है यह । एक तरफ भावनात्मक कहानियाँ हैं जैसे -सर्वेंट क्वार्टर, बिरधा आसरम, आखिरी सांस ,रोटी, देश से और उम्मीद जो हमारे समाज के इर्द-गिर्द घूमती नजर आ रही हैं। इन कहानियों में हम कहीं कहीं किसी पात्र के रूप में अपने आप को भी महसूस कर पाते हैं। कभी ऐसा लगता है कि इस तरह की कहानियाँ समाज में सुनी सुनाई या घट रही हैं इसलिए कहा जाता है कि

'कहानी (गल्प) एक रचना है जिसमें जीवन के किसी एक अंग या किसी एक मनोभाव को प्रदर्शित करना ही लेखक का उद्देश्य रहता है। उसके चरित्र, उसकी शैली, उसका कथा-विन्यास, सब उसी एक भाव को पुष्ट करते हैं।

सर्वेंट क्वार्टर में माता-पिता से बच्चों के बिगड़ते रिश्ते और उनके बीच बढ़ती दूरियों की कहानी है, जिसमें एक पिता की अभिलाषा तार तार हो जाती है इसका जीवंत और मार्मिक चित्रण है ।

आगे की कहानियाँ जैसे संजोग ,गरीबी की जिद ,लोहा ,सखी ऐसी कहानियाँ हैं जो समाज को नई राह और नई सोच के साथ जीने की प्रेरणा देती हैं। लेखक ने अपनी लेखनी से महिला-सशक्तिकरण जोर दिया है । गरीबी की जीद और लोहा ऐसी कहानियाँ है जो महिलाओं के द्वारा समाज में अपनी स्थान को स्थापित करने और संघर्ष की घटनाओं पर आधरित हैं ।

नारी सशक्तिकरण (woman empowerment) आज के समय में समाज को आगे बढ़ाने एवं संबंधों को संजोने का एक अस्त्र है जिसे लेखक ने जागरूकता के रूप में प्रस्तुत किया है ।

गुरु और शिष्य की मजबूत परम्परा पर आधारित कहानियाँ गुरु दक्षिणा और पूजा हैं। ये कहानियां दर्शाते हैं कि किसी भी सफल छात्र के पीछे उसके गुरु का परिश्रम और त्याग होता है और शिष्यों द्वारा अपने गुरु का सम्मान गुरु के लिए गौरव की बात होती है । आगे दो कहानियाँ किन्नर और हँसुली ऐसी कहानियाँ हैं जो दिल को छू लेती हैं जो यह दर्शाती है कि इंसानियत जात-पात ,ऊंच-नीच ,अमीर गरीब और लिंगभेद से बहुत ऊपर है । किन्नर कहानी पढ़ने के बाद लगता है कि समाज में उनके प्रति जो भेदभाव है वह बिल्कुल निराधार है उसमें वह भी सारी काबिलियत है जो अपनी त्याग और तपस्या से किसी को नया जीवन दे सकते हैं और उसे एक सफल नागरिक बना सकते हैं । किन्नरों का समाज के प्रति ऐसी सोच सराहनीय है जो यह दर्शाती है कि वह भी हम जैसे ही एक सामान्य मनुष्य हैं ।

हँसुली एक ऐसी कहानी है जो सामाजिक रिश्तों को संजीदगी से दर्शाती है। पड़ोसी कहानी पढ़ने के बाद ऐसा लगता है कि समाज में धर्म के आधार पर जो घटनाएं घट रही हैं वे केवल राजनीतिक रोटी सेंकने मात्र के लिए हैं । असल में, इंसानियत धर्म से ऊपर है । लेखक ने इस कहानी के माध्यम से समाज को जागरूक और सचेत करने की कोशिश की है ।कहानी में इंसानियत को सर्वोपरि दर्शाया गया है ।

लेखक ने सफलता एवं असफलता, कथनी करनी, संबंधों का मिलना बिछड़ना, नारी के महत्व जैसे मुद्दों पर प्रकाश डाला है । लेखक ने सरल वाक्य रचना ,भोजपुरी के सरल शब्दों का प्रयोग बखूबी किया है। जिससे पाठकों को पढ़ने और समझने में आसानी होती है ।

भोजपुरी के शब्दों का चयन और प्रवाहमय शब्दों के इस्तेमाल से कहानियों को रोचक बनाया गया है ।वैसे तो संग्रह की ज्यादातर कहानियाँ पाठक को सोचने के लिए जमीन देती हैं तो कहीं-कहीं कहानियों के विषय का दोहराव खटकता भी है । ज्यादातर कहानियाँ अति-यथार्थवादी और भावनात्मक हैं ।

आज के संदर्भ में यदि आप अपनी खामियों में सुधार कर परिवार के साथ , समाज के साथ बढ़ना चाहते हैं तो आपको 'अगरासन' कहानी संग्रह जरूर पढ़नी चाहिए ।यह कहानी संग्रह पारिवारिक रिश्तो को एक सूत्र में बांधने में मददगार साबित हो सकती है । इसमें जीवन से जुड़ी कहानी और उदाहरणों की बहुतायत है जो पाठक को बांधकर रखती है लेखक ने समाज से जुड़ी समस्याओं और व्यवहारिक समाधान पर भी जोर दिया है । कुल मिलाकर यह कहानी संग्रह समाज को सकारात्मक राह दिखाने का काम करती है।

पुस्तक: अगरासन(भोजपुरी कहानी संग्रह)
लेखक: डॉ० गोरख प्रसाद मस्ताना
समीक्षक: कृपी कश्यप, गाज़ियाबाद
प्रकाशक:
जे-बी एस पब्लिकेशन ( इंडिया )
अंसारी रोड ,नई दिल्ली
मूल्य : १००/


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