मुखपृष्ठ
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 87, जून(द्वितीय), 2020

एक नज़र देख लेता....

सुरेंद्र सैनी बवानीवाल "उड़ता"

इश्क़ की धूप में आँखें सेक लेता, हुस्ने-बाज़ार एक नज़र देख लेता. है हवा में महक उसके तन की, ज़रा तबियत से उधर देख लेता. ना होती रंज1. उनसे दूर जाने की, जो उन्हें जीभर अगर देख लेता. दिल ख़ुशी से गुलज़ार2. हो जाता, तनिक उनके,लबे-अधर3.देख लेता. यूं ना भटकता गली-कूचे4."उड़ता", इक दफा जो उनका घर देख लेता.
1.अफ़सोस 2.खिला बगीचा आदर 3.निचला होंठ 4.संकरा रस्ता

कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें