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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 87, जून(द्वितीय), 2020

जब तेरा नाम आया...

सुरेंद्र सैनी बवानीवाल "उड़ता"

जब भी बातों में तेरा नाम आया, हवाओं संग कोई पयाम1. आया. उठ गया जो तेरा जिक्र लबों पर, याद करने भर का काम आया. तोड़कर दिल मेरा मुस्कुरा दिए, ये कैसा,उनका एहतराम2.आया. हुआ जख्म तो रक्त रिसने लगा, फिर कब जाकर निदान3. आया. देखते हैं लोग तड़पना गरीब का, ख़बर बनी,उठकर अवाम4.आया. हसरतें5. कर रही बेचैन इस कदर, देखी तस्वीर तेरी,तो अराम आया. रूठकर चली गई कायनात6."उड़ता", खोलके देखी खिड़की,सलाम आया.
1.सन्देश 2.सम्मान, आदर 3.कारण 4.जनता 5.इच्छाएं 6.सृष्टि

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