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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 87, जून(द्वितीय), 2020

बंद गली

अर्विना गहलोत

मकान की तलाश में कई दिन बीत गए सचिन बहुत परेशान था ज्यादा किराया देने की जेब गवाही नहीं दें रही थी । जिस दोस्त के यहां रुका था उसने कहा तू कहे तो एक जगह है कम किराए में लेकिन गली बंद है इस लिए वहां कम किराए पर घर मिल सकता है क्योंकि बंद गली में वास्तू शास्त्र को मानने वाले अशुभ मानते हैं ।

तुम कहो तो वहां का पत बता दूंगा क्या ख्याल है ?

तुम मुझे उस जगह का पता दो में देखना चाहता हूं ।

दोस्त ने पर्ची पर पता लिख दिया उसे लेकर में पहुंच गया गली के मोड़ पर एक आदमी से मकान नंबर बीस पूछा तो मेरी तरफ देखने लगा और आप बंद गली में जाना है सामने से राइट में मुड़कर सीधे अंतिम मकान सरोज देवी का है । आदमी के बताए रास्ते पर कदम बढ़ा दिए ।और अब मैं मकान नंबर बीस के सामने खड़ा था ।मैंने घंटी बजाई अंदर से एक महिला ‌बाहर आई और मुझसे पूछा क्या काम है ?

मुझे मकान किराए पर चाहिए सुना है आपका एक मकान खाली है ।

हां ! मकान खाली है ।

आप गली में आगे चलिए मैं चाबी लेकर आती हूंं।

मैं गली के अंतिम छोर की ओर चल दिया अब मैं वाहा पहुंच गया मकान देखने में बहुत अच्छा लेकिन आगे गली बंद थी । इस ख्याल को झटक दिया और मन ही मन सोचा ईश्वर सब जगह है । मुझे मकान की जरुरत थी वो भी कम किराए पर ।

सरोज देवी आई और उस खूबसूरत मकान को खोलकर दिखाया मैं बहुत खुश हुआ देखकर और मैंने हां कर दी और तय हुआ कि आज ही से वो इसमें रहने आ जायेगा । बयाना सरोज देवी के हाथ पर रखकर मकान पक्का‌ कर लिया । वापस दोस्त के पास लौट कर आया तो उसे ये खुश खबरी दी उसने कहा सोच ले सचिन एक बार फिर बंद गली का मकान है ।

कोई बात हीं जहां से रास्ता बंद ‌होता है वहीं से नया द्वार खुल भी तो सकता है शायद मुझे कोई और जाब मिल जाए और मैं किराया दे सकूं सचिन पत्नी और सामान को लेकर रहने पहुंच गया ।

रहते हुए सचिन के दो प्रमोशन हो गए हैं ।

अब इस गली लोग मेरे नाम से जानते है।


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