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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 87, जून(द्वितीय), 2020

दुनिया का सबसे अच्छा धर्म -
'मासिक धर्म'

स्वर्णलता 'विश्वफूल'

बुढ़यापे होते हैं मर्मान्तक तिल-तिल तिलसते देखी है, दादा-दादी को और कई दंपति को ! प्रेम-जुदाई होते हैं दर्दनाक खुद को तिल-तिल टूटती देखी है मैंने ! जानेवालों के दर्द भोगनेवाले जिस भी गलती के शिकार हो वह प्रायश्चित कर भी क्षमा नहीं पाती ! क्योंकि वे औरों में रत यानी औरत जो थी ! क्योंकि औरत सिर्फ 'संधि' के लिए है, पुरूष को चाहिए सिर्फ रस है और उन्हें तो दूसरे की पत्नी ही भायेगी ! पर औरत अगर औरत की सहेली रहे, वे दूसरे की पति को ताके नहीं, और वे करती रहे पत्नीशुदा पुरुषों का बहिष्कार, तभी भोगों के परमेश्वर ये मरदजन स्वपत्नी धर्म निभायेंगे ! फिर तब दुनिया के सर्वश्रेष्ठ धर्म होंगे- 'मासिक धर्म' !


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