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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 87, जून(द्वितीय), 2020

वही अपना नाम बनाएंगे

रौली मिश्रा

लाखों की भीड़ है लाखों में ही नाम बनायेंगे लाखों सिकंदर भीड़ में आए हैं पर कुछ ही अपना नाम बनाएंगे ।। लाखों की आवाज है लाखों का आगाज है पर कुछ ही ये जंग जीत पाएंगे लाखों में आए हैं पर कुछ ही अपना नाम बनाएंगे ।।। लाखों में सब उतरे हैं पर कुछ ये जंग छोड़कर जाएंगे लाखों मे टिकेंगे वही जो अपना सपना आगे लाएंगे वही अपना नाम बनाएंगे ।।। लाखों सूर्य की तरह चमके हैं लाखों में ही वो चमक पाएंगे डूबेगे वही जो मेहनत न कर पाएंगे चमकेगे सितारे वही जो उड़ान भर पाएँगे वही अपना नाम बनाएंगे।।।।


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