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Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 87, जून(द्वितीय), 2020

लॉकडाउन का उत्सव

डॉ रानू मुखर्जी

बन्द हैं सब दरवाजे , पर मन है कि उडना भरे फडफडाए पर न डरे , लॉकडाउन का कोई असर नहीं ,वह रोके न रूकने चले विहार करने वन की ओर । अंतर्मन जैसा न वन कोई, आओ लौटे सभी उस ओर, गहन मनन का समय यही। न मिलेगा ऐसा वक्त कभी, दूर के रिस्ते निकट हुए सभी। गिले शिकवे सब धुल गए धोते धोते हाथ। न मन में रहा , न रहा हाथ में मैल धुल पुछकर सब हो गए साफ। आओ आज हम सब एक बंधन में बंध जाएँ और कष्ट में भी लॉकडाउन का उत्सव मनाएं।


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