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Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 87, जून(द्वितीय), 2020

मुस्कान

राम निवास मीना

मुस्कान का मनोविज्ञान ही…. चौपट हो गया, लील लिया सब, कोरोना ने….. मास्क के बहाने…….। अब चिंता है लोगों को……. भला, भाव कैसे करेंगे जाहिर ? कोविड-19 के दौर में…… सवाल यही है, आखिर…..। जो मुस्कान……… पुरस्कार पाने और आश्चर्यचकित होने पर, चेहरे से झलकती…… अभिव्यक्ति के मूड को निखारती….। जो मुस्कान……… दोस्ती की भावना को जाहिर करती, अच्छे समय की याद दिलाती….. जो मुस्कान……… मानवीय संबंधों को प्रगाढ़ करती, अपने प्रभाव को प्रदर्शित करती, दिमागी हलचल को चेहरे के…. हावभावों से प्रकट करती। अब, वही मुस्कान……. पहरेदार (मास्क) के चंगुल से निकलकर, ऊर्ध्वगामी हो……., सिमटकर, थककर….. मात्र, आंखों में…….. तैरती नजर आएगी। और, हरेक नागरिक को….. आमोद- प्रमोद के साथ, सुख-दु:ख के सभी भावों को, नेत्र-ज्योति स्वरूप, प्रकट कर पाएगी।।


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