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Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 87, जून(द्वितीय), 2020

नारी

प्रकाश कुमार खोवाल

किसी किताब के पन्नों में लिखा था नारी को देवी का रूप कहा था पर आज नारी को कोई देवी नहीं मानता उसे खुलेआम बदनाम करने से कोई नहीं चूकता पुराणों में जहां नारी की शक्ति को दर्शाया आज वहां नारी को समझ कोई नहीं पाया जिस देश में नारियों को देवी के रूप में पूजा वहीं उनके साथ खिलवाड़ करने से कोई नहीं चूका दुष्ट कर रहे हैं उन पर बार-बार अत्याचार फिर भी चुप बैठी है दुनिया, देख नारी का ये हाल कभी शारीरिक दमन तो, कभी हो रहा है बलात्कार नारी ही जाने कैसे सहन करती है अपना ये हाल आज घर के बाहर नहीं है अब वो सुरक्षित कैसे करेगी वो अब अपने अंगों को रक्षित भूल गए हैं आज, हम अपने अस्तित्व की बात आओ अब जाग जाएं हम, नारी को फिर से माने देवी हम हर मुश्किल हर पल में दें उसका साथ समझे अपने को सुरक्षित इस संसार में वो आज


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