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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 87, जून(द्वितीय), 2020

जिंदगी

प्रकाश कुमार खोवाल

हर मोड़ पर एक नया एहसास है जिंदगी मेरे कुछ अनूठे सपनों की सौगात है जिंदगी मैंने अपना कर्तव्य बखूबी निभाया अपनी राह के कांटों को खुद हटाया मेरी असफलताओं ने मुझे झुकने ना दिया मंजिलों ने मेरी मुझे रुकने ना दिया मेरी तकदीर की क्या बात करें कुछ पुराने रिश्तों को भूलाएं तो कुछ नए अपनाएं कठिनाइयों से बहुत कुछ सीखा है मैंने खुद के लिए जी लिया, जीना है अब अपनों के लिए राहों में अनुभव क्या खूब मिले मुझे मैं हर रोज वक्त के साथ निखरता गया मेरे अपनों ने ही मुझे झुकाने की नाकाम कोशिश की लेकिन मेरी चाहत ने मुझे झुकने ना दिया जिंदगी की राह में खुद को अकेला पाया लेकिन हालात तूने मेरे मुझे रुकने ना दिया हर मोड़ पर एक नया एहसास है जिंदगी मेरे कुछ अनूठे सपनों की सौगात है जिंदगी


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