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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 87, जून(द्वितीय), 2020

स्वच्छता अपनाओ

महेन्द्र देवांगन माटी

आओ प्यारे मिलजुल करके , सब कोई हाथ बढायेंगे । बीमारी अब पास न आये , गंदगी तुरंत भगायेंगे ।।1।। कूड़ा कचरा को मत फेंको , एक जगह सब डाले जाओ । कागज झिल्ली पुट्ठा रददी , गड्डे डालो आग लगाओ ।।2।। जगह जगह ना थूकों प्यारे , अब स्वच्छ रखो दीवारों को । समझा दो सब खाने वाले , नशा पान के मतवालों को ।।3।। रहे स्वच्छ परिवेश हमारा , हम सब की भागीदारी है । साफ सुथरा पर्यावरण हो , हम सबकी जिम्मेवारी है ।।4।। हाथ बढाओ आगे आओ , हरियाली मिलकर लायेंगे । झूम उठेगी सारी धरती , पौधे भी खूब लगायेंगे ।।5।।

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