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Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 87, जून(द्वितीय), 2020

महाराणा प्रताप
(महाराणा प्रताप जयंती पर विशेष)

कमलेश शर्मा "कवि कमल"

अमिट स्याही से लिख दी गाथा, अपने ही बलिदान की। जय मेवाड़ के वीर प्रताप, जय- जय राजस्थान की।। जेष्ठ शुक्ल तृतीया को, हिन्दुआ सूरज का जन्म हुआ। उदयसिंह जयवंता के जाये ने, अजबदे से विवाह किया।। कुम्भलगढ़,गोगुन्दा,चावंड, खमनोर भी वो निशानी है। हल्दीघाटी और दिवेर की, इतिहास में अमर कहानी है।। जलाल,मानसिंह,भगवानदास, टोडर,आये कई प्रस्ताव लिए। सच्चे, शूरवीर, देशभक्त, योद्धा ने सब हे ठुकरा दिए।। रक्त बहा था झालामान, राणा पुंजा, हकिम की छाती से। धन्य हुई मेवाड़ धरा भामाशाह, चेतक जैसे साथी से।। मातृभूमि की रक्षा की खातिर प्रण एक ऐसा लिया। छोड़ दिए सब राज-पाट, जंगल में पूरा जीवन जिया।। प्राण दे दिए पर लाज रखी है, अपने हिन्दूस्तान की। जय हो महाराणा प्रताप, जय- जय राजस्थान की।।


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