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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 87, जून(द्वितीय), 2020

प्रार्थना

कमलेश शर्मा "कवि कमल"

हे परमपिता, हे माँ शारदा, मुझको ऐसा तुम वरदान दो। रुक न पाए कभी, कलम ये मेरी, मुझको ऐसा कोई ज्ञान दो।। 1 बन के तेरा उपासक, करूँ प्रार्थना, मेरी वाणी को न विराम दो। छूना चाहूँ गगन, तेरी छांव में, भावनाओं को वो आयाम दो।। 2 हे परमपिता…… शब्दों की माला ये, मुरझाए ना, चाहे जैसा तुम मुझे मान दो। गीत गाता रहूँ, तेरे रात दिन, मेरे अधरों को वो सम्मान दो।। 3 हे परमपिता……… ना कोई दुखी, ना कोई गम, सबके चहरों पे ऐसी मुस्कान दो। चाहे देना मुझे, जो भी तुम प्रभु, मुझको कोई न अभिमान दो।। 4 हे परमपिता……


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