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Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 87, जून(द्वितीय), 2020

भ्रष्टाचार

हंस राज ठाकुर

इधर देखा उधर देखा, देखा खोल के अख़बार, देश सेवा की कोई खबर न मिली, सब जगह लिखा था भ्रष्टाचार । छोटा या बड़ा बचा नहीं कोई,सबके गले में यह फंदा है, चोर तो मजबूर आदत का है,मगर शरीफ़ों का भी यही धंधा है । रिश्वतखोरी और चोरबाजारी का देखो, हर जगह बोलबाला है, मेहनत की कदर कम हो गई, भाई भतीजाबाद ही तो चलाना है । देश की तरक्की संभव नहीं है यारो, इस भ्रष्टाचार के पैमाने से, चोर भी तो नहीं डरता है आज, पुलिस के आ जाने से । समय आ गया है दोस्तों, कुछ कर गुजर जाने का, खुद को भ्रष्टाचार मुक्त करके, देश को बचाने का । समझने वाले समझ गए होंगे ‘हंस’, आम आदमी की आवाज को, अब न संभले तो कभी न संभले, तरस जायेंगे तख्तोताज को ।


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