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Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 87, जून(द्वितीय), 2020

नारी का संघर्ष

डॉ. अपराजिता सुजॉय नंदी

नारी के लिए संघर्ष की परिभाषा हर परिभाषा से अलग होती है वास्तव में संघर्ष है किस बात की यह एक सवाल बनी रहती है। संघर्ष है आत्मसम्मान का और अधिकारो को पाने का यह संघर्ष है। संघर्ष है बंधनों को तोड़ने का और खुली हवा में सांस लेने का यह संघर्ष है । संघर्ष है अपना पक्ष रखने का और विचारों को व्यक्त करने का यह संघर्ष है। संघर्ष है निर्णय लेने का और फैसला सुनाने का यह संघर्ष है । संघर्ष है अब कुछ ना सहने का और सब कुछ कहने का यह संघर्ष है। संघर्ष है पैरों तले न रहना का और आसमान में उड़ान भरने का यह संघर्ष है । संघर्ष है अपनी पहचान बनाने का और साधारण से ख़ास होने का यह संघर्ष है। संघर्ष है अपना अस्तित्व बनाए रखने का और उज्जवल भविष्य को पाने का यह संघर्ष है। संघर्ष है नव निर्माण की सोच का और कुछ नया कर दिखाने का यह संघर्ष है । संघर्ष है अंधविश्वास को खत्म करने का और परम्पराओं को परिष्कृत करने का यह संघर्ष है। संघर्ष है पितृसत्ता को समाप्त करने का और मातृसत्ता को स्थापित करने का यह संघर्ष है। संघर्ष है एक नव निर्मित भारत का और उसमें नारी की भूमिका का यह संघर्ष है। यह संघर्ष ही तो है जो हमें निरंतर संघर्ष करने को प्रेरित करती। यह संघर्ष ही तो है जो हमें निरंतर महसूस करवाती है कि हम नारी है एक पुरुष की जन्मदात्री।


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