मुखपृष्ठ
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 87, जून(द्वितीय), 2020

आज़ाद गजल

अजय प्रसाद

हो गया है विकृत मानसिकता का शिकार वेव सीरीज है अश्लीलता और भौंडापन का अम्बार वेव सीरीज । टिक-टॉक ,व्हाट्सपप,लाइक,हैलो,औ पब जी के बाद दौर-ए-इंटरनेट का है बेहद घातक विकार वेब सीरीज । सड़े-गले कथानकों पे करते हैं दोस्तों बदबूदार अभिनय कला के नाम पे कर रहा कलंकित संस्कार वेब सीरीज । बेसीर पैर की कहानियाँ उसपर अधनंगी ये जवानियाँ आज है आधुनिकता के लिए अत्याचार वेब सीरीज । उड़ा कर धज्जियां तहजीबों और रवायतों की बेशर्मी से बेखौफ़ करते हैं अजय अब प्रचारऔ प्रसार वेब सीरीज ।

कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें