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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 87, जून(द्वितीय), 2020

ग्रीष्म ऋतु पर दोहे

सुमन अग्रवाल "सागरिका"

ग्रीष्मऋतु का आगमन, धरती चैन न पाय। फसलें सूखी खेत में,....पेड़ गये मुरझाय।। कड़ी धूप ऐसी पड़ी, धरा गई सब सूख। गर्मी का मौसम हुआ, पड़े जोर की धूप।। गर्मी के संताप से,..........धरा हुई बेहाल। जून मास की दुपहरी, तन मन हुआ निढाल।। कर्ज में डूबा किसान, माथे शिकन हजार। उल्टा-सीधा व्याज दे, खुद भूखा लाचार।। फसलें चौपट हो गई....जल का हुआ अभाव। बिषम परिस्थिति सामने, मन में होत तनाव।। बीज वो दिए खेत में........करें खेत खलिहान। बारिस का मौसम हुआ, खुश है आज किसान।। मेहनत करे लगन से,....माने कभी न हार। कृषक देवता आप ही, जीवन का आधार।।

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