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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 87, जून(द्वितीय), 2020

बाल गीत :
बाहर कोरोना है .....

डॉ० घनश्याम बादल

बाबा, बाहर मत जाओ , बाहर कोरोना है , इम्युनिटी हो कम तो , बाहर ख़तरा होना है ..... आओ, मिलकर बैठें दोनों , हिलमिल खेलेंगे , पिट्ठू तो तुम खेल सको ना, लूडो ले लेंगे । नरम -गरम कुछ खाओ बाबा, अच्छा होता है , सारा दिन भी पड़े पड़े, यूं कोई सोता है? अभी - अभी मम्मी ने भेजा , हलवा दोना है । बाबा, बाहर मत जाओ , बाहर कोरोना है । पहले साबुन ले लो बाबा , हाथों को धोना है , बार - बार धोने से बाबा , जादू होना है , मर जाएगा यूं कोरोना , बात ये जानो तुम , सच‌ कहता हूं सच्ची मुच्ची , बाबा मानो तुम , इसी बात पर दादी बोली, 'बाबू छौना है ।' बाबा, बाहर मत जाओ , बाहर कोरोना है ।

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