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वर्ष: 2, अंक 39, जून(द्वितीय), 2018



बिछोह पोती का


पीताम्बर दास सराफ"रंक"


                         
रह गये दो प्राणी
घर में अकेले
किसको कहें अब
बेटा बेटी
किसके संग में खेलें।।1।।

इस कमरे से उस कमरे में
ढूंढा करें हैं उसको
अब आयेगी चुपके से और
देगी थप्पा हमको
घूमें दो प्राणी घर में अकेले।।2।।

उसके संग छुपन छुप्पैय्या
दौड़ा दौड़ी,मारा मारी
उसकी हँसी पे हमने अपनी
सारी दुनियाँ वारी
बैठे दो प्राणी घर में अकेले।।3।।

कहती घोड़ा बनो तुम दादु
हम बैठेंगे तुम पर
बालहठ के आगे होते
नतमस्तक हैं हमसब
चुपचुप दो प्राणी घर में अकेले।।4।।

कांधे आके कहती दादु
दादी तो है बच्ची
सुनाने कहती कोई कहानी
झूठी हो या सच्ची
पगलायें दो प्राणी घर में अकेले।।5।।

इतनी प्यारी लाड़ली बेटी
अब विदेश विराजे
अपने मां बापू के संग में
उनके सुख दुख बांटे
घुटते दो प्राणी घर में अकेले।।6।।
 

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