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वर्ष: 1, अंक 15, जून(द्वितीय), 2017



नर्स

डॉ.पूर्णिमा राय


वो है एक पारिचारिका 
पर सखी की तरह
रखती थी सबका ख्याल!!
जानते थे लोग उसको
असली नाम से नहीं
बल्कि उसके सेवा भाव से!!
उसके दिल की गहराइयों में
भरा था अपनापन,
ममत्व और करूणा!!
उन मरीजों के लिए
जो अपने जीवन की डोर
छोड़ देते थे उसके सहारे!!
खुद के दर्द से बेखबर 
अधरों पर हंसी सजाए
मासूम दिलों पर करती थी राज!!
कितने लोग कितने कष्ट
असहनीय पीड़ा को 
सहती थी हर पल!!
अपनों को खोजती हुई
सूनी निगाहें निस्वार्थ
बाँटती रही प्रेम व दया!!
कभी ये नर्स माँ सी लगती
तो कभी अनजान राहों का राही
और कभी महादेवी का गिल्लू!!
जिसके कोमल स्पर्श की छुअन
बेजान में भी डाल देती थी जान!!
तप त्याग का व्रत धारण 
करने वाली एकाकी जीवन में 
बिखेरती रही फूलों की सुगंध !!
काश !लौट आए फिर
मदर टैरेसा जैसी सेवा-भावना
संजोने वाली महान आत्मा !!नर्स!!

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