Sahityasudha view
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
मुखपृष्ठ


साहित्यकारों की रचना स्थली

वर्ष: 1, अंक 15, जून(द्वितीय), 2017



तुमको मैं पहचानता नहीं!

डॉ० अनिल चड्डा

                                                              
मैं तुमको जानता हूँ, इसलिये पहचानता नहीं,
मेरा दिल लेकिन दिमाग की तो मानता नहीं।

चेहरे हैं सब छुपे हुये, नकली नकाब में,
असलियत पता न चले, कोई उतारता नहीं।

दूजे के दोष दिख रहे अंधकार में भी हैं,
अपनी कमी को मैं कभी संवारता नहीं।

हर राह में मिलेंगे फूल, कांटें भी तुझे,
पैरों की जूतियों से मैं बिगाड़ता नहीं।

कोई जोर से सलाम दे, कोई लात मार दे,
दुनिया के इस चलन को मैं नकारता नहीं।

कृपया अपनी प्रतिक्रिया sahityasudha2016@gmail.com पर भेजें