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वर्ष: 1, अंक 15, जून(द्वितीय), 2017



गीत
विषय-रजनीगंधा


सुशील शर्मा

                                                              
रजनीगंधा की खुशबू फैली है आँगन में।
सारी खुशियां भर दी है तुमने दामन में।
         
प्रियतम जबसे जीवन मे तुम आये हो।
बादल जैसे बन कर तुम छाए हो।
          
सूखे जीवन मे जल धार बही।
अब न कोई प्यास बाकी रही।
         
रजनीगंधा फूला है रातों में।
रात कट गई बातों ही बातों में।
         
अब न जाना छोड़ के इस प्रेमी पागल को।
जी भर कर बरसा दो प्रेम के बादल को।
         
रजनीगंधा के फूल सजे हैं गजरे में।
न जाने क्या बात है तेरे कजरे में।
         
सुरभित तन मन रजनीगंधा फूला है।
मन मतंग प्रियतम संग झूला झूला है।
         
आओ प्रियतम जीवन का सत्कार करें।
रजनीगंधा सी सुगंध सा प्यार करें।


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