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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 3, अंक 62, जून(प्रथम), 2019

बाल-मन

विश्वम्भर पाण्डेय 'व्यग्र'

बाल मन, निष्पाप मन इंसानियत की नाप मन हिंसा कपट से दूर मन होता प्रभु की छाप मन दूध जैसा पवित्र मन रंगों से भरा चित्र मन वैर-भाव से विरक्त मन बालमन सबका मित्र मन पशु-पक्षी,कीट-पतंग सब लगते हैं एक ही रंग सब ये बाल मन की विशेषता बड़े होते मन के तंग सब


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