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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 3, अंक 62, जून(प्रथम), 2019

शिव-शंकर को प्यारी बेल

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"

जो शिव-शंकर को भाती है बेल वही तो कहलाती है तापमान जब बढ़ता जाता पारा ऊपर चढ़ता जाता अनल भास्कर जब बरसाता लू से तन-मन जलता जाता तब पेड़ों पर पकती बेल गर्मी को कर देती फेल इस फल की है महिमा न्यारी गूदा इसका है गुणकारी पानी में कुछ देर भिगाओ घोटो-छानो और पी जाओ ये शर्बत सन्ताप हरेगा तन-मन में उल्लास भरेगा


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