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वर्ष: 2, अंक 41, जुलाई(द्वितीय , 2018



यथार्थ के करीब है ' मैं शबाना '


गणेश गनी


उपन्यास पढ़ने के लिए बहुत एकाग्रता और समय चाहिए। इसके कारण हैं कि कहानी और पात्रों को याद रखना पड़ता है, घटनाओं को जोड़े रखना होता है, कड़ी से कड़ी जोड़े रखनी पड़ती है। परंतु मैं शबाना हूं एक ऐसा उपन्यास है जिसमें पाठक इस तरह के बंधनों से मुक्त है। यूसुफ रईस ने अपनी लेखनी की कुशलता से इसे बहुत आसान और रोचक बनाया है। कहानी में थोड़े पात्र हैं और आपस में स्वाभाविक तौर पर जुड़े हुए हैं। कहानी अपने आप कड़ी से कड़ी जोड़े आगे बढ़ती है।

यह उपन्यास शबाना के इर्दगिर्द बुना गया है। बुनावट ऐसी है कि ऊब पैदा नहीं होती। मुस्लिम परिवार और समाज की परम्परा की परतों को खोलते हुए यह उपन्यास बारीकी से एक एक पहलू को वर्णित करता है।

एक औरत जो संघर्ष करती है दो परिवारों के बीच पिसते हुए और हार नहीं मानती। उसके साथ बहुत अत्याचार होते हैं, लेकिन ये अस्वाभाविक नहीं लगते, इसमें कोई ड्रामा नहीं होता, बल्कि ऐसे लगता है जैसे यह बहुत सारी महिलाओं की कहानियों में से एक है।

उपन्यास के अंदर बहुत से ऐसे मुद्दे हैं जो पहली बार लेखक ने उठाए हैं। हालांकि यह सब होता होगा परंतु उपन्यास के माध्यम से उन्हें उठाना साहस का काम है। यूसुफ अपने मकसद में कामयाब हुए लगते हैं। कुछ घटनाओं को संकेतों में बताया गया है, यह लेखक की कुशलता का एहसास करवाता है, वरना कई लेखक ऐसी बातों को चमकदार बना कर परोसते हैं और फिर यदि ठीक से पेश न कर पाए तो अश्लीलता घटना को निगल जाती है।

मुझे केवल एक घटना यथार्थ से हटकर लगी, वो यह कि एक अजनबी उसे एक शर्त जीतने के लिए अपने साथ एक घण्टे के लिए होटल में ले जाता है और उसे छुए बग़ैर वापस भेज देता है। इस शर्त और पूरी घटना पर लेखक कोई विशेष बात नहीं जोड़ पाया, यानि जस्टिफाई नहीं कर पाया। इसके स्थान पर कुछ और होता तो बेहतर होता। उपन्यास में केवल यही घटना है जो नकलीपन का एहसास दिलाती है।बाकी सब तो यथार्थ लगता है। हालांकि पूरे उपन्यास में रोचकता बनी रहती है, सस्पेंस भी रहता है। उपन्यास का अंत बेहद शानदार है। अंत वाले हिस्से का संघर्ष बहुत ही मार्मिक है और पढ़ते हुए पाठक द्रवित होता है।

यूसुफ रईस का यह उपन्यास नए लेखकों को पढ़ना चाहिए क्योंकि इसमें साधारण भाषा और शिल्प के बावजूद भी उपन्यासकार ने करिश्मा पैदा किया है। लेखक को बधाई।

मैं शबाना (उपन्यास )
लेखक- यूसुफ़ रईस
मूल्य- 199/-
कुल पृष्ठ- 182
प्रकाशक- नोशन प्रेस, चेन्नई
उपलब्ध- अमेज़न,फ्लिप्कार्ट,इन्फीबीम


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