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वर्ष: 2, अंक 41, जुलाई(द्वितीय , 2018



भेड़ चाल


शुचि'भवि'


आज दसवीं का रिजल्ट आने वाला था।पूनम और विकास दोनों ही बहुत चिंतित थे कि उनकी इकलौती संतान,निधि,अपने दादा और नाना का सपना पूरा भी कर पायेगी या नहीं।

निधि एक साधारण पढ़ने वाली मगर बेहतरीन क्रिकेटर थी।दादा,नाना और पिताजी का डॉक्टर होना मानो उसके लिए अभिशाप हो गया था।उस पूरे खानदान में, पूनम बस अपनी बेटी की भावनाओं को समझती थी।

निधि माँ के पास आकर धीरे से बोली थी उस दिन," माँ, मुझे डॉक्टर नहीं,क्रिकेटर बनना है।"

मगर किसी ने निधि और पूनम की बात को तवज्जो नहीं दी थी पूरे घर में।

आज ग्यारवीं का रिज़ल्ट आया है,निधि अंग्रेजी को छोड़ सभी विषयों में फेल थी मगर वह इंडियन जूनियर क्रिकेट टीम में सेलेक्ट हो गयी थी।

निधि की कोच के समझाने पर आज रात के खाने की मेज़ पर पहली बार अपना पक्ष रखते हुए कहा था कि ,"क्यों हम निधि को भेड़ चाल सिखा रहें हैं,एक कीमती साल तो बर्बाद हो ही गया है उसका,ये तो अच्छा हुआ उसने स्कूल में क्रिकेट जारी रखा।इस वर्ष निधि आर्ट्स सब्जेक्ट से प्राइवेट बारहवीं की परीक्षा देगी।"

पूनम ने इतने वर्षों सब चुपचाप ही माना था मगर आज उसकी बेटी के भविष्य का अंधेरा मिटाने वो सच में पूनम की चाँदनी बन छिटकी थी।


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