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वर्ष: 2, अंक 41, जुलाई(द्वितीय , 2018



एकता की ताकत


अंकित भोई 'अद्वितीय'


विद्यालय में विभिन्न खेलों के आयोजन में अब कुछ ही दिन शेष बचे थे। उस समय रणकपुर एवं श्रीरामपुर के विद्यालय की फुटबॉल टीम चिर-प्रतिद्वंद्वी थी। रणकपुर विद्यालय की फुटबॉल टीम का स्ट्राइकर खिलाड़ी अशोक उस क्षेत्र का प्रसिद्ध खिलाड़ी था। अशोक विद्यालय में होने वाले फुटबॉल मैच के लिए कठोर अभ्यास कर रहा था। अशोक के लिए इस मैच का महत्व इसलिए भी अधिक था क्योंकि इस मैच को जीतने वाली टीम का चयन राज्य स्तरीय खेलों के लिए होना था। जैसे-जैसे मैच का दिन नजदीक आते जा रहा था दोनों गांवों में चर्चाएं तेज होने लगी थी। दोनों टीमों की आपसी प्रतिद्वंदिता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता था कि मैच के दौरान दोनों गांव के लोग अंडे सड़े हुए टमाटर लेकर मैदान में जाते थे ताकि खराब प्रदर्शन करने पर लोगों को मार सके साथ ही अपनी टीम के खिलाड़ियों के उत्साहवर्धन के लिए टीम के बीजों को बजाते थे। कभी-कभी स्थिति इतनी खराब हो जाती थी कि दोनों गांव के लोग आपस में मारपीट कर बैठते थे।

आखिर वह दिन आ ही गया जिसका सबको बेसब्री से इंतजार था, रविवार छुट्टी के दिन रणकपुर विद्यालय के विशाल मैदान में फुटबॉल का बहुप्रतिक्षित मुकाबला प्रारंभ हो गया दोनों टीमों के खिलाड़ी गोल दागने के लिए जोर लगाने लगे पर पहले हाफ का खेल समाप्त होने तक कोई भी की टीम गोल नहीं कर सकी। रणकपुर टीम के अशोक पर कप्तानी और स्ट्राइकर की दोहरी जवाबदारी थी। दूसरे हाथ में अशोक के पास गया ना थी तो थी लेकिन वह दूसरे खिलाड़ियों को पास देने के बजाय स्वयं ही गोल करना चाहता था लेकिन श्रीरामपुर टीम के खिलाड़ियों ने इसके विपरीत शानदार पास का प्रदर्शन किया और रणकपुर की टीम को 0 के मुकाबले 2 गोलों से पराजित कर दिया। खेल समाप्ति के पश्चात रणकपुर टीम के फुटबॉल प्रशिक्षक मेहता जी ने अशोक व साथी खिलाड़ियों को बुलाया और हार का विश्लेषण करते हुए बताया कि अशोक के पास ना देने वह अकेले गोल करने की महत्वकांक्षा ने टीम की लुटिया डुबो दी। वहीं दूसरी ओर श्रीरामपुर के खिलाड़ियों ने आपसी एकता और टीम भावना का प्रदर्शन करते हुए मैच जीत लिया और यह साबित कर दिया कि एकता के बल पर कोई भी मुक़ाबला जीता जा सकता है।


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