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वर्ष: 2, अंक 41, जुलाई(द्वितीय), 2018



गलतियों का इनाम


रवि प्रभात


     	
साल भर का काम,
काम ना आया..

मैंने अपने गलतिओं का
इनाम है पाया ..

इतनी गलतिओ के बाद भी
कंपनी ने तरक्की पाई है

पर मेरी तरक्की किसी
को भी याद नहीं आई है

मर -मर के किये काम
फिर भी हुए बदनाम

तब भी ना हार मानेंगे
अपने आप को सुधारेंगे

HR ने अपनी ही चलाई है
मेरी अच्छाई में भी बुराई नज़र आई है

मैनेजर ने अपनी नॉलेज बढ़ाई है
उसे MSDN और एंगुलर में भी खोट नज़र आई है

फिर भी करेंगे काम
चाहे जितने हों बदनाम

गलतिओं को दोहरायेंगे
अगले साल फिर से इनाम पाएंगे
  

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