Sahityasudha view
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
मुखपृष्ठ


साहित्यकारों की रचना स्थली

वर्ष: 2, अंक 41, जुलाई(द्वितीय), 2018



पीहर पधारी वर्षा रानी


रामदयाल रोहज


    	   	
घने काले कोमल कुंतल 
चमक गहनों की सुन्दर है
लजाकर छुप गया दिनकर
हाथ सिर पे है अंबर का
' सदा फूलो फलो बेटी '
बढाकर बाँह तरु भैया 
गले मिलने को आतुर है
ननद को देखकर भाभी-
लता खङी द्वार पर झूमी
मिलन भू माता बिटिया का
खुशी के बह चले आँसू
बहुत दिन बाद आई हो 
मिलन को मन तङफता था
सखी सूखी सरिता के भी
तन में जान आई है
लहरिया लहराकर अपना
संग खेलन को कहती है
नाचते है मयूर मस्ती में
मनो बच्चों की टोली है 
घरों में गुलगुले बनते 
सिवईयां खीर की खुशबू
गाँव में हो रहा उत्सव 
पीहर वर्षा पधारी है ।

कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें