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वर्ष: 2, अंक 41, जुलाई(द्वितीय), 2018



मां की पुकार


निशा नंदिनी गुप्ता


   
उठो धरा के अमर सपूतों 
माँ ने फिर पुकारा है 
यह  कश्मीर हमारा है ,
यह हिंदुस्तान हमारा है । 

आँख दिखाए जो दुश्मन 
उसको हम न छोड़ेगें 
अपने वीरों का बदला हम 
गिन गिन कर फिर ले लेगें ।
हर बच्चा कहता अब तो 
यह कश्मीर हमारा है ,
यह हिंदुस्तान हमारा है । 

जिस माँ की गोदी में खेले 
उसकी रक्षा करना है 
देनी पड़े जां अगर तो 
फिर पीछे न हटना है । 
हर दिशा कहती अब तो
यह कश्मीर हमारा है 
यह हिंदुस्तान हमारा है । 

क्या समझा है तुमने हमको 
हम तो माँ के सच्चे लाल
देवो की इस पवित्र भूमि में 
तुमने फैलाया है जाल ।
कफन ओड़ कर कहते हम तो
यह कश्मीर हमारा है 
यह हिंदुस्तान हमारा है । 

हम तो हैं कलम सिपाही 
न रुकने देंगे अब कलम को
भरकर कलम में स्याही 
दिखला देंगे अब दुश्मन को ।
वीर रस में कहते हम तो
यह कश्मीर हमारा है 
यह हिंदुस्तान हमारा है ।
 

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