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वर्ष: 2, अंक 41, जुलाई(द्वितीय), 2018



क्यों चुप रहती हो


महेन्द्र देवांगन माटी


   
चुप चुप रहती हो ,
कुछ बात भी ना करती हो ।
चुपके से आती हो ,
स्टेटस देखकर चली जाती हो ।
खफा हो या कोई बात है, 
हमें भी तो बताओ ।
यूँ ही इस तरह उदास रहकर, 
हमें ना तड़पाओ ।
आप खुश रहेगी तो , 
हमें भी अच्छा लगेगा ।
नहीं तो हमारा भी मन ,
अनजाने भय में ही कटेगा ।
 

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